COBI Urges Government for Reform in Industrial Inspection and Closure Process
झज्जर जिले के समस्त उद्योगों का प्रतिनिधित्व कर रही औद्योगिक संस्था कॉन्फेडरेशन ऑफ बहादुरगढ़ इंडस्ट्रीज (कोबी) की एक महत्वपूर्ण बैठक अध्यक्ष प्रवीण गर्ग के मार्गदर्शन में आयोजित की गई, जिसमें उपाध्यक्ष विपिन बजाज, महासचिव प्रदीप कौल, संयुक्त सचिव सुरेन्द्र वशिष्ठ, कोषाध्यक्ष अशोक कुमार मित्तल एवं अन्य माननीय कार्यकारिणी सदस्य उपस्थिति रहे। बैठक में उद्योगों से जुड़े एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय— वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) द्वारा औद्योगिक इकाइयों पर की जाने वाली निरीक्षण प्रक्रिया एवं तत्काल क्लोजर नोटिस जारी करने की कार्यवाही—पर विस्तार से चर्चा की गई।
सीएक्यूएम समय-समय पर उद्योगों का निरीक्षण करता है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उनके द्वारा जारी दिशा-निर्देशों एवं पर्यावरण संबंधी मानकों का पालन किया जा रहा है या नहीं।
यह प्रक्रिया निश्चित रूप से पर्यावरण संरक्षण के दृष्टिकोण से आवश्यक है, परंतु कई बार ऐसी परिस्थितियाँ उत्पन्न हो जाती हैं जब किसी उद्योग में कोई मशीन, उपकरण या प्रदूषण नियंत्रण संबंधी यंत्र अचानक खराब हो जाता है। ऐसी स्थिति में संबंधित उद्योग द्वारा उस कमी को दूर करने की प्रक्रिया पहले से ही प्रारंभ कर दी जाती है, आवश्यक मरम्मत कार्य चल रहा होता है, तथा कई मामलों में हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचएसपीसीबी) से आवश्यक कंसेंट एवं अनुमति भी प्राप्त होती है। इसके बावजूद सीएक्यूएम बिना वास्तविक परिस्थिति को समझे और बिना सुधार का अवसर दिए सीधे तत्काल क्लोजर नोटिस जारी कर देता है।
किसी भी उद्योग के ऊपर केवल उत्पादन की जिम्मेदारी ही नहीं होती, बल्कि कर्मचारियों के वेतन, उनके परिवारों की आजीविका, घरेलू आपूर्ति, निर्यात ऑर्डर, बैंक लोन, सरकारी देनदारियाँ, सप्लायर भुगतान तथा अनेक वित्तीय और सामाजिक उत्तरदायित्व भी जुड़े होते हैं। ऐसे में बिना सुधार का अवसर दिए किसी उद्योग को तत्काल बंद कर देना न केवल उद्योग के लिए, बल्कि उससे जुड़े सैकड़ों परिवारों के लिए भी गंभीर संकट उत्पन्न कर देता है।
उद्योग देश के आर्थिक विकास की रीढ़ हैं। यही उद्योग रोजगार सृजन करते हैं, राजस्व बढ़ाते हैं, निर्यात को मजबूती देते हैं और देश की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। परंतु जब यही उद्योग विभागीय प्रक्रियाओं और कठोर प्रशासनिक निर्णयों के कारण बिना पर्याप्त अवसर के बंद किए जाते हैं, तो इसका प्रभाव केवल उद्योगपति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसमें कार्यरत कर्मचारियों, उनके परिवारों, स्थानीय अर्थव्यवस्था, प्रदेश और अंततः पूरे देश पर पड़ता है। इस प्रकार की कार्यवाही उद्योगों का मनोबल तोड़ती है और निवेश एवं विकास की भावना को कमजोर करती है।
झज्जर जिले के सभी उद्योगों की ओर से कोबी ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्री, सीएक्यूएम के चेयरमैन, तकनीकी टीम प्रमुख, हरियाणा के मुख्यमंत्री, हरियाणा उद्योग महा निदेशक एवं संबंधित विभागों के अधिकारियों को यह महत्वपूर्ण सुझावों ओर समस्याओं से पत्राचार द्वारा अवगत कराया कि ऐसी परिस्थितियों में तत्काल क्लोजर नोटिस जारी करने के स्थान पर उद्योगों को कम से कम 30 से 60 दिनों का नोटिस पीरियड दिया जाना चाहिए, ताकि वे अपनी कमियों को दूर कर सकें और आवश्यक अनुपालन पूर्ण कर सकें क्योंकि कई बार आवश्यक उपकरणों की उपलब्धि होने में भी समय लग जाता है। इस अवधि के दौरान विभाग द्वारा उद्योग को उचित मार्गदर्शन भी दिया जाना चाहिए, जिससे वह निर्धारित मानकों के अनुरूप स्वयं को शीघ्रता से सुधार सके। यदि आवश्यक हो तो इस अवधि में पेनल्टी भी लगाई जा सकती है, परंतु बिना सुधार का अवसर दिए तत्काल बंदी उद्योगों और कर्मचारियों दोनों के लिए अत्यंत हानिकारक सिद्ध होती है।
झज्जर जिले के सभी उद्योगों की तरफ से एक सुझाव एवं प्रश्न भी है
जब उद्योग सरकार एवं प्रशासन को अपने और अपने कर्मचारियों के विकास हेतु कोई सुझाव या मांग प्रस्तुत करते हैं, तो क्या उन पर भी इसी प्रकार तत्काल कार्रवाई होती है? आज झज्जर जिले के उद्योग मूलभूत सुविधाओं—सड़क, सीवरेज, बिजली, जल निकासी, ट्रांसपोर्ट एवं अन्य बुनियादी ढांचे—के लिए प्रतिदिन संघर्ष कर रहे हैं। इन आवश्यक सुविधाओं को प्राथमिकता देने के बजाय यदि उद्योगों पर केवल दंडात्मक कार्यवाही की जाए, तो यह उद्योगों के विकास के बजाय उनके उत्साह और विश्वास को कमजोर करता है।
कॉन्फेडरेशन ऑफ बहादुरगढ़ इंडस्ट्रीज ने केंद्रीय सरकार, हरियाणा सरकार एवं सभी संबंधित विभागों से विनम्र निवेदन किया है कि इस विषय पर गंभीरता से विचार किया जाए और ऐसी नीतियाँ बनाई जाएँ जो उद्योगों को प्रोत्साहित करने वाली हों, न कि उन्हें हतोत्साहित करने वाली। जहाँ उद्योगों से वास्तव में कोई त्रुटि होती है, वहाँ उन्हें कम से कम 30 से 60 दिनों का सुधारात्मक नोटिस दिया जाए, ताकि वे अपनी गलती को सुधार सकें। यदि निर्धारित समय के बाद भी अनुपालन नहीं किया जाता, तब सरकार एवं संबंधित विभागों द्वारा सख्त कार्रवाई अवश्य की जाए। परंतु प्रथम चरण में सुधार का अवसर देना ही न्यायसंगत, व्यावहारिक और उद्योग हित में होगा।
आभार
टीम कोबी

