Industries Demand Fair Treatment Amid Growing Neglect in Jhajjar District
जिला झज्जर के उद्योगों के साथ भेदभावपूर्ण रवैये पर गंभीर प्रश्न
आखिर कब तक उद्योगों को नजरंदाज किया जाता रहेगा
उद्योगों द्वारा अर्जित करोडों रुपये के राजस्व का जिले के उद्योगों में कितना हिस्सा विकास और निर्माण कार्यों में लगाया जाता है?
जिला झज्जर के सभी उद्योगों का प्रतिनिधित्व कर रही औद्योगिक संस्था कन्फेडरेशन ऑफ बहादुरगढ़ इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष श्री प्रवीण गर्ग एवं अन्य सदस्यों द्वारा सरकार के भेदभावपूर्ण रवैये पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।
अक्सर देखने और सुनने में आता है कि जिले या बहादुरगढ़ के विकास के लिए विभिन्न जनप्रतिनिधियों द्वारा बड़े-बड़े ऐलान किए जाते हैं—जैसे इस वित्तीय वर्ष में 1000 करोड़ रुपये के कार्य, 148 करोड़ रुपये की परियोजनाएं, दिव्य शहर के निर्माण आदि।
लेकिन इन घोषणाओं के बीच यह प्रश्न उठता है कि इसी जिले को भारी राजस्व देने वाले उद्योग, उनके कर्मचारी और औद्योगिक क्षेत्र आखिर किस श्रेणी में आते हैं?
जिले के सभी औद्योगिक क्षेत्रों की समस्याओं को बार-बार लिखित रूप में देने, अवगत कराने और दिखाने के बावजूद, सरकार के प्रतिनिधि उद्योगों के मुद्दों पर कोई ठोस चर्चा नहीं करते।
जिन उद्योगों के योगदान से सरकारी बजट मजबूत होता है, वही उद्योग आज सरकारी एजेंडा से बाहर नजर आते हैं।
यह भी बहुत चिंताजनक है कि कुछ औद्योगिक संस्थाएं, जो स्वयं को अग्रणी बताती हैं, वे भी सामूहिक हितों से अधिक अपने व्यक्तिगत स्वार्थों तक सीमित दिखाई देती हैं। उनको कोई मतलब नही की उद्योग विकास करे उनको केवल अपने विकास से मतलब है
स्थिति अत्यंत गंभीर है। यदि उद्योगों, औद्योगिक क्षेत्रों और वहां कार्यरत कर्मचारियों की मूलभूत सुविधाओं को इसी प्रकार नजरअंदाज किया जाता रहा, तो वह दिन दूर नहीं जब उद्योग धीरे-धीरे बंद होने की कगार पर पहुंच जाएंगे।
इसका सीधा प्रभाव आने वाली पीढ़ियों और उन लाखों लोगों पर पड़ेगा, जिन्हें उद्योगों द्वारा रोजगार मिलता है।
उद्योग हमारे देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। समाज के अनेक वर्ग और हजारों परिवार इन पर निर्भर हैं। बढ़ती महंगाई के इस दौर में, रोजगार सृजन करने वाले उद्योगों का विकास और संरक्षण अत्यंत आवश्यक है।
अतः केंद्र एवं प्रदेश सरकार से निवेदन है कि इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर गंभीरता से विचार कर उचित कदम उठाए जाएं।
आभार
टीम कोबी

