Industrial Issues Reach the High Court
जिले के उद्योगों की मूलभूत समस्याओं को लेकर अब उच्च न्यायालय जाएगी कोबी
कन्फेडरेशन ऑफ बहादुरगढ़ इंडस्ट्रीज (कोबी) के अध्यक्ष प्रवीण गर्ग द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, झज्जर जिले के औद्योगिक क्षेत्रों में वर्षों से सड़क, सीवरेज, जल निकासी, पेयजल, स्ट्रीट लाइट, विद्युत व्यवस्था तथा अन्य मूलभूत नागरिक सुविधाओं के गंभीर अभाव के कारण उद्योग लगातार कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि उद्योगों एवं विभिन्न विभागों द्वारा समय-समय पर अनेक बार संबंधित अधिकारियों के समक्ष समस्याएं उठाई गईं, ज्ञापन दिए गए तथा समाधान की मांग की गई, लेकिन स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। इसके कारण उद्योगों, कर्मचारियों और निवेशकों को लगातार आर्थिक एवं परिचालन संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
प्रवीण गर्ग ने कहा कि करों का नियमित भुगतान करने के बावजूद यदि उद्योगों को आवश्यक नागरिक सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई जातीं, तो यह गंभीर चिंता का विषय है। उद्योगों को बार-बार अपने मौलिक अधिकारों और बुनियादी सुविधाओं के लिए विभागों के समक्ष गुहार लगाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
एक उद्योगपति का काम होता है अपने उद्योग को चलाकर राष्ट्र हित में रोजगार के लिए, राजस्व अर्जित करने के लिए उत्पादन करना और अपने देश की तरक्की में सहभागी बनना, ना की सरकार द्वारा दी जाने वाली मूल भूत सुविधाओं के आभाव में संघर्ष करना। उद्योगपति और कर्मचारियों का समय इस तरह के संघर्ष में न जाकर अपने उद्योगों के प्रति संचालन में जाए तो ही देश प्रगति कर सकता है और आर्थिक स्थिति से हम विश्व में अपनी सशक्त पहचान बना सकते हैं।
झज्जर जिले के उद्योगों, कर्मचारियों एवं प्रत्येक नागरिक के मौलिक अधिकारों की रक्षा हेतु माननीय उच्च न्यायालय में जनहित याचिका (पीआईएल) दायर करने का निर्णय
आखिर कब तक?
आखिर कब तक प्रत्येक करदाता, उद्योगपति और नागरिक अपने कर्मचारियों एवं समाज के मौलिक अधिकारों के लिए संबंधित विभागों के सामने बार-बार याचना करता रहेगा?
आखिर कब तक अपने अधिकारों के लिए अपराधियों की तरह सुविधाओं को ना देने वाले अधिकारियों और विभागों के समक्ष गिड़गिड़ाते रहेंगे?
जबकि प्रत्येक अधिकारी एवं प्रत्येक विभाग की अपनी नैतिक जिम्मेदारी है की नागरिको के मौलिक अधिकारों के तहत उसको सुरक्षा और सुविधायें देना अति अनिवार्य है ।
सरकार द्वारा दिशानिर्देश के अनुसार प्रत्येक विभाग की जिम्मेदारी तय की गई है फिर क्यों या कैसे इतने बुरे हालात हैं ?
क्योंकि जब भी कोई समस्या होती है तो फिर भी क्यों उच्च अधिकारियों द्वारा निर्देश भी संबंधित विभागों को ही दिए जाते हैं
यानी की लापरवाही विभागों की और अपराधी सभी उद्योग एवं नागरिक।
बहुत बड़ा प्रश्नचिन्ह है-
आखिर कोन जिम्मेदार है इतनी बड़ी लापरवाही का ?
कहां जाता है इतना बजट ?
करोडों रुपये के उद्घाटन और दिखाने के लिए विकास और निर्माण आखिर है कहाँ ?
उद्योगों में करोड़ों रुपये के लागत के काम दिखाए जाने वाले आखिर है कहाँ?
जब उद्योग समय पर कर, जीएसटी, बिजली शुल्क, ईएसआई, ईपीएफ और अन्य सभी वैधानिक दायित्वों का पालन करता है, तो उसे बदले में सड़क, जल निकासी, स्वच्छता, स्ट्रीट लाइट, पेयजल, सुरक्षा और अन्य मूलभूत नागरिक सुविधाओं के लिए बार-बार आवेदन क्यों करना पड़ता है?
यह कैसी व्यवस्था है, जहाँ अधिकार मांगने वाला स्वयं को गुनाहगार की तरह महसूस करता है, जबकि जवाबदेही उन विभागों की होनी चाहिए जिनकी जिम्मेदारी नागरिक सुविधाएँ उपलब्ध कराना है?
लोकतंत्र में जनता और करदाता याचक नहीं, बल्कि व्यवस्था के भागीदार हैं। सरकारी विभागों का दायित्व है कि वे निर्धारित बजट और प्राप्त करों का पारदर्शी एवं प्रभावी उपयोग करें तथा नागरिकों और उद्योगों को समय पर आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध कराएँ।
समय आ गया है कि व्यवस्था ऐसी बने, जहाँ अधिकारों के लिए बार-बार प्रार्थना नहीं, बल्कि जिम्मेदार विभागों से समयबद्ध जवाबदेही सुनिश्चित हो। विकास तभी सार्थक होगा, जब करदाता को सम्मान मिले और नागरिक सुविधाएँ उसकी मांग पर नहीं, बल्कि उसके अधिकार के रूप में उपलब्ध हों।
कॉन्फेडरेशन ऑफ बहादुरगढ़ इंडस्ट्रीज़ (कोबी) ने झज्जर जिले के सभी औद्योगिक क्षेत्रों, उद्योगों में कार्यरत हजारों कर्मचारियों तथा प्रत्येक नागरिक के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। संगठन ने तय किया है कि मूलभूत नागरिक सुविधाओं की लगातार उपेक्षा एवं संबंधित विभागों की जवाबदेही सुनिश्चित कराने के लिए माननीय पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में जनहित याचिका (पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन – पीआईएल) दायर की जाएगी।
कोबी का कहना है कि झज्जर जिले के उद्योग देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। उद्योगों के माध्यम से लाखों लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार मिलता है तथा केंद्र और राज्य सरकारों को जीएसटी, आयकर, बिजली शुल्क, स्टाम्प शुल्क, संपत्ति कर तथा अन्य अनेक करों के रूप में प्रतिवर्ष करोड़ों रुपये का राजस्व प्राप्त होता है। उद्योगों के निरंतर योगदान से ही भारत आज विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हुआ है और वैश्विक स्तर पर चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में अग्रसर है।
इसके बावजूद अत्यंत गंभीर प्रश्न यह है कि जब उद्योग और नागरिक नियमित रूप से कर (टैक्स) का भुगतान कर रहे हैं, तब उन्हें मूलभूत सुविधाएँ क्यों नहीं मिल रही हैं?
हर वर्ष केंद्र एवं राज्य सरकारें हजारों करोड़ रुपये का बजट प्रस्तुत करती हैं। यदि बजट स्वीकृत होता है, तो वह धन कहाँ व्यय हो रहा है?
क्या संबंधित विभागों की यह संवैधानिक एवं नैतिक जिम्मेदारी नहीं है कि वे नागरिकों और उद्योगों को सुरक्षित सड़कें, स्वच्छ वातावरण, पेयजल, जल निकासी, स्ट्रीट लाइट, पार्क और अन्य मूलभूत सुविधाएँ उपलब्ध कराएँ?
आज झज्जर जिले के अनेक औद्योगिक क्षेत्रों में स्थिति यह है कि—
- सार्वजनिक सड़कों एवं फुटपाथों पर अतिक्रमण है।
- पैदल चलने के लिए सुरक्षित स्थान उपलब्ध नहीं है।
- बरसात के समय गंभीर जलभराव (वाटर लॉगिंग) होता है।
- सीवर एवं सफाई व्यवस्था अपर्याप्त है।
- अनेक स्थानों पर स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था नहीं है।
- रात्रि सुरक्षा के लिए पर्याप्त स्ट्रीट लाइट उपलब्ध नहीं हैं।
- पार्कों एवं हरित क्षेत्रों का अभाव है।
- पर्यावरण संरक्षण एवं स्वच्छता संबंधी मानकों का समुचित पालन नहीं हो रहा।
- अग्निशमन गाड़ियां और स्टाफ की कमी
•लगभग 100 करोड़ रुपये का कर्माचारियों के लिए ईएसआईसी हॉस्पिटल 5 सालों से उद्घाटन क्यों नही
•सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में सीएलयू (चेंज ऑफ लैंड यूस) देकर अपनी फीस लेकर हजारों उद्योगों को स्थापित करने की अनुमति तो दे दी, लेकिन उन उद्योगों के सुचारु संचालन के लिए आवश्यक मूलभूत सुविधाएँ आज भी गंभीर रूप से अपर्याप्त हैं।
कोबी का स्पष्ट मत है कि यह केवल उद्योगों का विषय नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक के संवैधानिक अधिकारों का विषय है।
भारत के संविधान का अनुच्छेद 21 प्रत्येक नागरिक को गरिमापूर्ण जीवन का अधिकार प्रदान करता है। इसी अधिकार के अंतर्गत सुरक्षित आवागमन, स्वच्छ पर्यावरण, स्वच्छ पेयजल एवं आवश्यक नागरिक सुविधाएँ भी सम्मिलित हैं।
भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने 19 जून 2026 के अपने महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया कि “पैदल चलने का अधिकार (राइट तो वॉक)” अनुच्छेद 21 के अंतर्गत एक मौलिक अधिकार है। न्यायालय ने कहा कि प्रत्येक सड़क पर पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित एवं अतिक्रमण-मुक्त स्थान उपलब्ध कराना सरकार का संवैधानिक दायित्व है।
इसके अतिरिक्त 27 अगस्त 2024 को सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार एवं संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिए थे कि सड़कों एवं राष्ट्रीय राजमार्गों पर अतिक्रमण की नियमित निगरानी की जाए, निरीक्षण व्यवस्था विकसित की जाए, शिकायत निवारण तंत्र स्थापित किया जाए तथा अतिक्रमण हटाने की प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
इन महत्वपूर्ण न्यायिक निर्देशों के बावजूद यदि नागरिकों एवं उद्योगों को मूलभूत सुविधाएँ उपलब्ध नहीं हो रही हैं, तो यह अत्यंत गंभीर चिंता का विषय है।
इसी संदर्भ में कोबी माननीय पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय से अनुरोध करेगा कि संबंधित विभागों की जवाबदेही निर्धारित की जाए तथा उन्हें समयबद्ध रूप से निम्नलिखित सुविधाएँ उपलब्ध कराने के निर्देश दिए जाएँ—
- सभी सार्वजनिक स्थानों एवं सड़कों से अतिक्रमण हटाया जाए।
- प्रत्येक सड़क पर सुरक्षित एवं अतिक्रमण-मुक्त पैदल मार्ग उपलब्ध कराया जाए।
- स्वच्छ पेयजल की समुचित व्यवस्था की जाए।
- सीवर, सफाई एवं ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को प्रभावी बनाया जाए।
- जलभराव की स्थायी रोकथाम की जाए।
- सभी औद्योगिक क्षेत्रों एवं सार्वजनिक मार्गों पर पर्याप्त स्ट्रीट लाइट लगाई जाए।
- स्वच्छ, सुंदर एवं पर्यावरण-अनुकूल पार्क एवं हरित क्षेत्र विकसित किए जाएँ।
- सभी विभागों की कार्यप्रणाली की नियमित निगरानी एवं जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।
कोबी का मानना है कि यह याचिका किसी सरकार, विभाग या अधिकारी के विरुद्ध नहीं है, बल्कि संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों की रक्षा, झज्जर जिले के औद्योगिक विकास, कर्मचारियों के हितों तथा प्रत्येक नागरिक को बेहतर जीवन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से दायर की जाएगी।
उद्योगों को चलाने के लिए सरकार अनेक प्रकार के लाइसेंस, प्रमाणपत्र और अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) तो अनिवार्य करती है, लेकिन उद्योगों को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए आवश्यक मूलभूत सुविधाओं का आज भी भारी अभाव है।
अब समय आ गया है कि यह सुनिश्चित किया जाए कि सरकारों द्वारा स्वीकृत बजट का उपयोग धरातल पर दिखाई दे, विभाग अपनी जिम्मेदारी निभाएँ और उद्योगों एवं नागरिकों को उनके अधिकारों के अनुरूप मूलभूत सुविधाएँ प्राप्त हों।
इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए जिले के सभी उद्योगों के हित में कन्फेडरेशन ऑफ बहादुरगढ़ इंडस्ट्रीज (कोबी) ने पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में जनहित से जुड़े विषयों को लेकर याचिका दायर करने का निर्णय लिया है, ताकि संबंधित विभागों की जवाबदेही सुनिश्चित हो और उद्योगों को समयबद्ध रूप से आवश्यक मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।
कोबी ने जिले के सभी उद्योगपतियों से इस जनहित अभियान में सहयोग देने तथा एकजुट होकर उद्योगों के हितों की रक्षा के लिए आगे आने का आह्वान किया है।
आभार
टीम कोबी


