Industries Raise Concern Over 35% Minimum Wage Hike in Haryana
झज्जर जिले के सभी उद्योगों का नेतृत्व कर रही औद्योगिक संस्था कॉन्फेडरेशन ऑफ बहादुरगढ़ इंडस्ट्रीज (कोबी) ने हरियाणा सरकार द्वारा न्यूनतम वेतन में लगभग 35% की अचानक वृद्धि पर गहरी चिंता व्यक्त की है। न्यूनतम वेतन को ₹11,257 से बढ़ाकर ₹15,200 प्रति माह कर दिया गया है, जिससे लगभग ₹4,000 प्रतिमाह की सीधी वृद्धि हुई है। लेकिन वास्तविक प्रभाव केवल वेतन वृद्धि तक सीमित नहीं रहेगा—ईपीएफ, ईएसआई, बोनस, ग्रेच्युटी आदि वैधानिक देनदारियों को जोड़ने पर प्रति कर्मचारी लगभग ₹7,000 तक का अतिरिक्त वित्तीय बोझ उद्योगों पर पड़ेगा।
कन्फेडरेशन ऑफ बहादुरगढ़ इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष श्री प्रवीण गर्ग, उपाध्यक्ष श्री विपिन बजाज, महासचिव श्री प्रदीप कौल, संयुक्त सचिव श्री सुरेंद्र वशिष्ठ, कोषाध्यक्ष श्री अशोक कुमार मित्तल सहित माननीय कार्यकारिणी सदस्यों ने इसपर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों में इस प्रकार का एकमुश्त निर्णय उद्योगों, विशेषकर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के लिए अत्यंत चुनौतीपूर्ण सिद्ध होगा।
कोबी के अध्यक्ष श्री प्रवीण गर्ग ने कहा कि वर्तमान समय में उद्योग पहले से ही युद्ध जैसी स्थिति के कारण उत्पन्न आर्थिक दबावों का सामना कर रहे हैं। एक ओर जहां कच्चे माल की कीमतों में निरंतर वृद्धि हो रही है, वहीं वैश्विक परिस्थितियों के कारण आपूर्ति श्रृंखला भी प्रभावित है। ऐसे समय में कर्मचारियों के लिए गैस आपूर्ति की समस्या को दूर करने के लिए उद्योग एवं प्रशासन मिलकर प्रयास कर रहे हैं, ताकि श्रमिकों का पलायन न हो।
उन्होंने आगे कहा कि सरकार द्वारा इस प्रकार का अचानक 35% वेतन वृद्धि का निर्णय उद्योगों पर सीधी मार है, जो उन्हें पलायन के लिए मजबूर कर सकता है। उन्होंने कहा हम एक ओर श्रमिकों को रोकने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर ऐसे कदम उद्योगों के लिए अस्थिरता पैदा कर रहे हैं।
बिना किसी पूर्व विचार-विमर्श के इतनी बड़ी वृद्धि छोटे उद्योगों के लिए भारी आर्थिक बोझ साबित होगी, जिससे अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। उद्योगों की मौजूदा लाभप्रदता पहले ही सीमित है, और इस प्रकार का अतिरिक्त भार कई इकाइयों को घाटे की स्थिति में धकेल सकता है।
उन्होंने सरकार के इस कदम के प्रति असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि जब भी उद्योगों की समस्याओं के समाधान या सुविधाओं की मांग की जाती है, तो उस दिशा में अपेक्षित कार्यवाही नहीं होती। लेकिन जब उद्योगों पर दबाव बनाने की बात आती है, तो त्वरित निर्णय लिए जाते हैं, जो अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है और परिस्थितियों में सुधार न हुआ तो उद्योगों को मजबूरन दूसरे राज्यों में पलायन करना होगा।
अन्य राज्यों की तुलना में हरियाणा में न्यूनतम वेतन अब काफी अधिक हो गया है, जिससे राज्य की औद्योगिक प्रतिस्पर्धा प्रभावित होगी। ऐसी स्थिति में यदि उद्योग हरियाणा से पलायन करने के लिए मजबूर होते हैं, तो इसका सीधा प्रभाव राज्य के औद्योगिक विकास, निवेश और रोजगार पर पड़ेगा।उदाहरण के रूप में—
- हरियाणा में अकुशल श्रमिक का वेतन लगभग ₹15,200 प्रति माह है,
- जबकि उत्तर प्रदेश में यह लगभग ₹10,000–11,000,
- राजस्थान में ₹9,500–10,500,
- और पंजाब में ₹10,500–11,500 के बीच है।
इसी प्रकार अन्य श्रेणियों (अर्धकुशल, कुशल एवं उच्च कुशल) में भी हरियाणा के वेतन दर अन्य राज्यों की तुलना में काफी अधिक हैं, जिससे राज्य की औद्योगिक प्रतिस्पर्धा प्रभावित होने की आशंका है। इस प्रकार की वृद्धि को चरणबद्ध में लागू किया जाना चाहिए था, जिससे उद्योगों पर अचानक आर्थिक दबाव न पड़े और वे स्वयं को इस परिवर्तन के अनुसार ढाल सकें।
कॉन्फेडरेशन ऑफ बहादुरगढ़ इंडस्ट्रीज ने माननीय प्रधान मंत्री और हरियाणा के मुख्य मंत्री जी से पत्राचार द्वारा आग्रह किया है कि वह इस विषय पर गंभीरता से संज्ञान ले और उद्योगों के हितों को ध्यान में रखते हुए सभी राज्यों को समानता के साथ लेकर चलते हुए संतुलन बनाने का प्रयास करें , जिससे श्रमिक कल्याण और औद्योगिक विकास दोनों को एक साथ आगे बढ़ाया जा सके और सभी राज्यों में समानता बनी रहे ताकि राज्यों में ही प्रतिस्पर्धा का माहौल न बने।
आभार
टीम कोबी
