Gas Supply Crisis Hits Jhajjar Industries: COBI Demands Immediate Action
झज्जर जिले के समस्त उद्योगों का प्रतिनिधित्व करने वाली अग्रणी औद्योगिक संस्था कन्फेडरेशन ऑफ बहादुरगढ़ इंडस्ट्रीज़ (कोबी) ने झज्जर जिले के औद्योगिक क्षेत्रों में उत्पन्न गैस आपूर्ति संकट पर गहरी चिंता व्यक्त की है। कोबी के अध्यक्ष श्री प्रवीण गर्ग ने कहा कि वर्तमान समय में प्राकृतिक गैस (पीएनजी/सीएनजी) की अनियमित एवं अपर्याप्त आपूर्ति तथा कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की भारी कमी के कारण उद्योग गंभीर कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं, जिससे औद्योगिक गतिविधियाँ बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं।
उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा दिनांक 09 मार्च 2026 को जारी अधिसूचना के अनुसार औद्योगिक एवं वाणिज्यिक उपभोक्ताओं को पिछले छह महीनों की औसत खपत का 80% तक गैस उपलब्ध कराई जानी चाहिए, किंतु वास्तविकता में गैस आपूर्ति एजेंसियों द्वारा इन निर्देशों का पालन सही रूप में नहीं किया जा रहा है। उद्योगों को निर्धारित सीमा से काफी कम गैस उपलब्ध कराई जा रही है, जिसके कारण उत्पादन प्रक्रियाएं बाधित हो रही हैं और उद्योगों को मजबूरन अपने संचालन में कटौती करनी पड़ रही है। इसके साथ ही गैस की कीमतों में अचानक और अत्यधिक वृद्धि तथा निर्धारित सीमा से अधिक खपत पर अत्यधिक शुल्क वसूले जाने से उद्योगों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव बन रहा है, जिससे उनकी स्थिति और अधिक गंभीर हो गई है।
स्थिति उस समय और भी चिंताजनक हो जाती है जब कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की उपलब्धता भी लगभग समाप्त हो चुकी है। आपूर्तिकर्ताओं द्वारा स्टॉक की कमी बताई जा रही है, जिसके कारण उद्योग अपनी आवश्यकताओं के लिए भी सिलेंडर प्राप्त नहीं कर पा रहे हैं। यह दोहरी समस्या—एक ओर पीएनजी की सीमित आपूर्ति और दूसरी ओर एलपीजी सिलेंडरों की कमी—उद्योगों को ठप होने की स्थिति में पहुंचा रही है। कोबी के संयुक्त सचिव श्री सुरेंद्र वशिष्ठ ने बताया कि बहादुरगढ़ क्षेत्र में लगभग 500 उद्योग कॉरुगेटेड बॉक्स निर्माण से जुड़े हैं, जिनमें से 400 से अधिक इकाइयाँ अपने उत्पादन के लिए कमर्शियल एलपीजी पर निर्भर हैं, और गैस की अनुपलब्धता के कारण इन इकाइयों का उत्पादन गंभीर रूप से प्रभावित हो रहा है तथा कई इकाइयाँ बंद होने की कगार पर पहुंच गई हैं।
कोबी अध्यक्ष श्री प्रवीण गर्ग ने कहा कि इस संकट के परिणाम अत्यंत गंभीर हैं, क्योंकि उद्योगों को प्रतिदिन भारी उत्पादन हानि उठानी पड़ रही है, जिससे न केवल उद्योगों की आर्थिक स्थिति कमजोर हो रही है बल्कि सरकार को भी जीएसटी एवं अन्य करों के रूप में राजस्व हानि हो रही है। इसके अतिरिक्त सप्लाई चेन बाधित होने से अन्य संबंधित उद्योगों और बाजारों पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। सबसे अधिक चिंता का विषय यह है कि हजारों श्रमिकों के रोजगार पर संकट मंडरा रहा है और कई श्रमिक पहले ही बेरोजगार हो चुके हैं, जिससे सामाजिक एवं आर्थिक असंतुलन की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
कन्फेडरेशन ऑफ बहादुरगढ़ इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष श्री प्रवीण गर्ग, उपाध्यक्ष श्री विपिन बजाज, महासचिव श्री प्रदीप कौल, संयुक्त सचिव श्री सुरेंद्र वशिष्ठ, कोषाध्यक्ष श्री अशोक कुमार मित्तल सहित माननीय कार्यकारिणी सदस्य एवं झज्जर जिले के उद्योगपति श्री पुरुषोत्तम गोयल, श्री सुनील गर्ग, श्री रवि चमड़िया, श्री तिलक राज गर्ग, श्री नवल गर्ग, श्री राजेश गर एवं अन्य कोबी सदस्यों ने इस विषय पर चिंता जताते हुए कहा कि झज्जर जिले के सभी उद्योग इस विकट परिस्थिति में देश के साथ पूरी तरह खड़े हैं, लेकिन हम विनम्रतापूर्वक निवेदन करते हैं कि उद्योगों को सुचारु रूप से चलाने के लिए गैस आपूर्ति अत्यंत आवश्यक है। अतः यह सुनिश्चित किया जाए कि सरकार द्वारा जारी अधिसूचनाओं का गैस आपूर्ति एजेंसियां पूर्णतः पालन करें, किसी भी प्रकार की कालाबाज़ारी पर सख्त रोक लगाई जाए तथा उद्योगों को निर्बाध और पर्याप्त गैस आपूर्ति उपलब्ध कराई जाए, ताकि उद्योगों में कार्यरत कर्मचारी किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करें।”
साथ ही यह भी देखने में आ रहा है कि घरेलू गैस की उपलब्धता भी अत्यंत कम हो गई है, जिसके कारण उद्योगों में कार्यरत कर्मचारियों को अपने दैनिक जीवन में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। कर्मचारियों की इस समस्या को ध्यान में रखते हुए घरेलू गैस की सुचारु उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु भी सरकार एवं संबंधित विभागों द्वारा तत्काल और प्रभावी कदम उठाना अत्यंत आवश्यक है, ताकि श्रमिक वर्ग को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
अंत में, कन्फेडरेशन ऑफ बहादुरगढ़ इंडस्ट्रीज़ ने प्रशासन से आग्रह किया है कि इस गंभीर विषय पर तत्काल संज्ञान लेते हुए गैस आपूर्ति को सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप सुनिश्चित किया जाए, संबंधित एजेंसियों को नियमों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए जाएं तथा कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, ताकि उद्योगों का संचालन सामान्य रूप से जारी रह सके और क्षेत्र की औद्योगिक गतिविधियों को किसी प्रकार का दीर्घकालिक नुकसान न हो।
इसके अतिरिक्त, कोबी की ओर से यह भी सुझाव दिया गया कि इस प्रकार की आपात परिस्थितियां बिना पूर्व सूचना के कभी भी उत्पन्न हो सकती हैं। अतः एक बड़े, विकसित होते, वैश्विक स्तर पर आर्थिक रूप से चौथे स्तर पर उभरते हुए देश जिसमें उद्योग तेज गति से बढ़ रहे हैं, वहां यह आवश्यक है कि हमारे पास कम से कम 3 से 6 माह का बैकअप पूर्व से उपलब्ध हो, ताकि ऐसी स्थितियों में उद्योगों एवं आम जनता को किसी प्रकार की संकटपूर्ण परिस्थितियों का सामना न करना पड़े और आर्थिक गतिविधियां निर्बाध रूप से जारी रह सकें।
आभार
टीम कोबी

