COBI Submits Detailed Pre-Budget Representation on Practical GST Issues Affecting MSMEs and the Manufacturing Sector Ahead of Union/State Budget 2025–26
बजट 2025-26 से पूर्व कोबी ने उद्योगों की व्यावहारिक जीएसटी समस्याओं को लेकर व्यापक सुझाव प्रस्तुत किए
बहादुरगढ़।
कॉन्फेडरेशन ऑफ बहादुरगढ़ इंडस्ट्रीज़ (कोबी) ने आगामी केंद्रीय/राज्य बजट 2025-26 के मद्देनज़र उद्योगों, विशेषकर एमएसएमई एवं मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को प्रभावित कर रही व्यावहारिक जीएसटी समस्याओं को लेकर एक विस्तृत प्री-बजट रिप्रेजेंटेशन राज्य व केंद्र के जीएसटी अधिकारियों को सौंपा है ।
कोबी ने अपने सुझावों में स्पष्ट किया है कि जीएसटी लागू होने के बावजूद जमीनी स्तर पर उद्योगों को आज भी आईटीसी से जुड़ी अनिश्चितता, पोर्टल की तकनीकी समस्याएँ, कठोर अनुपालन, विभागीय विवेकाधीन कार्यवाही, ई-वे बिल से जुड़ी दिक्कतें तथा अनावश्यक मुकदमेबाज़ी जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
कोबी द्वारा प्रस्तुत सुझाव मुख्य रूप से तीन प्रमुख क्षेत्रों पर केंद्रित हैं—
1. जीएसटी नीति से संबंधित सुधार,
2. जीएसटीएन पोर्टल की तकनीकी एवं कार्यात्मक कमियाँ, तथा
3. जीएसटी अधिकारियों द्वारा शक्तियों के प्रयोग में पारदर्शिता व समानता सुनिश्चित करना।
संस्था ने विशेष रूप से यह मांग की है कि ईमानदार करदाताओं को विक्रेता की गलती के कारण आईटीसी से वंचित न किया जाए, जीएसटी पंजीकरण की रद्दीकरण प्रक्रिया को व्यावहारिक बनाया जाए, छोटे उद्योगों के लिए पंजीकरण सीमा बढ़ाई जाए तथा क्यूआरएमपी योजना को वास्तव में सरल बनाया जाए। इसके साथ ही ई-वे बिल प्रणाली में दंडात्मक प्रवृत्ति को समाप्त कर व्यापार-सहज दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया गया है।
कोबी ने यह भी कहा कि उद्योग सरकार के राजस्व में महत्वपूर्ण योगदानकर्ता हैं और नीतिगत स्थिरता, भरोसेमंद कर प्रशासन तथा उद्योग–सरकार के बीच सहयोग से ही “ईस ऑफ डूइंग बिजनेस” और आर्थिक विकास संभव है।
संस्था को आशा है कि बजट निर्माण के दौरान इन सुझावों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा, जिससे न केवल कर प्रशासन में सुधार होगा बल्कि उद्योगों को राहत मिलेगी और राज्य व देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्राप्त होगी।
— कॉन्फेडरेशन ऑफ बहादुरगढ़ इंडस्ट्रीज़ (कोबी)
